Saturday, August 13, 2016

ब्वॉयज का नया ट्रेंड ...

आज के युवा खुद को किसी फिल्म स्टार से कम नहीं समझते हैं। यही कारण वे आज कपड़ों के साथ-साथ हेयर स्टाइल और लुक्स पर काफी ध्यान देने लगे हैं। यंगस्टर्स कपड़ों तक ही सीमित नहीं, बल्कि आज वे हेयर और बियर्ड (दाढ़ी) को एक नया और डिफ्रेंट लुक दे रहे है। आजकल लड़कों के बीच हल्की-हल्की दाढ़ी रखने का क्रेज बढ़ा है। युवाओं के लिए अपना लुक चेंज करने का सबसे आसान तरीका हेयर स्टाइल और बियर्ड (दाढ़ी) चेंज करना है। बदली हुई हेयर स्टाइल आपके लुक में बदलाव लाने के साथ ही आपके व्यक्तित्व को भी आकर्षक बनाती है। क्लीन शेव वाले बॉयज़ की तुलना में आज कल दाढ़ी वाले बॉयज़ की डिमांड बढ़ गई है। लड़कियां उन लड़कों को रफ एंड टफ मानती हैं। बड़ी दाढ़ी रखने का फैशन ट्रेंड में है। हीरो भी रफ-टफ लुक में ही दिखाई देते हैं। लड़कियों को लगता है कि क्लीन शेव रहना अब आउट ऑफ फैशन हो गया है। जिनके चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ रहती हैं वे काफी मजबूत व्यक्तित्व के दिखते हैं। लड़कियों को मैच्योर दिखने वाले  लड़के पसंद आते हैं। क्लीन शेव लड़कों के चेहरे पर परिपक्वता इस हद तक नहीं झलकती, जितनी दाढ़ी की वजह से झलकती है।


लड़कियों को क्यों पसंद है दाढ़ी वाले लड़के

*. लड़कियों को दाढ़ी रखने वाले लड़के आकर्षक लगते हैं और वे स्मार्ट, सेक्सी और हैंडसम होते हैं।
*. दाढ़ी रखने वाले लड़के क्रिएटिव होते है।
*. लड़कियों को मैच्योर लड़के पसंद होते हैं। दाढ़ी और मुछ रखने से मैच्योरेंस झलकती है।
*. दाढ़ी रखने वाले लड़के समझदार लगते हैं और अलग-अलग स्टाइल लड़कियों को पसंद आती है।
*. क्लीन शेव वाले लड़के से बियर्ड(दाढ़ी) रखने वाले ज्यादा गंभीर होते हैं।


शॉर्ट क्रयू कट: फौज में इस तरह के हेयरकट का चलन है। इस स्टाइल में बाल शॉर्ट (छोटे) होते हैं। यह किसी भी
तरह के चेहरे पर सूट करता है। आज कल यह काफी चलन में है।
स्पाइक कट: आजकल युवाओं में स्पाइक्स वाले बालों का चलन बढ़ा है। इस हेयरस्टाइल में छोटे और कम बाल होता
है। सभी तरह के चेहरे पर यह स्टाइल अच्छा लगता है।
बज कट: यूथ इस कट के दीवाने हैं। जिनके बाल कम है और छोटे है उन लोगों के लिए यह स्टाइल काफी पसंद
आएगा। यह हेयर स्टाइल कैजुअल लुक और फॉर्मल लुक के लिए आजकल बहुत चलन में हैं।


12 अगस्त: अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस

विश्व के अधिकांश देशों में कोई न कोई दिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पूरे विश्व में
हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है। पहली बार सन 2000 में इसका आयोजन शुरू हुआ था। अंतरराष्ट्रीय युवा
दिवस मनाने का मतलब है कि सरकार द्वारा युवा के मुद्दों और उनकी बातों पर ध्यान आकर्षित करने का है। संयुक्त
राष्ट्र संघ ने वर्ष 1985 को अंतरराष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया। भारत में सबसे ज्यादा युवाओं की आबादी है। बहुत कम
लोग ही जानते होंगे कि 12 अगस्त का दिन उनके नाम है। युवाओं की ताकत ही किसी भी देश की तकदीर बदल
सकती है। जोश और जुनून से सराबोर रहने वाली युवा पीढ़ी ही किसी भी देश के भविष्य को बनाती या बिगाड़ती है।
युवा शक्ति का लोहा दुनिया भर में माना जाता है। पर युवा शक्ति को सकारात्मकता की ओर बड़ी मोड़ना चुनौती होती
है। विश्व भर में आज ज्यादातर युवा अपनी सुख सुविधाओं के लिए अपनी देश छोड़कर को दूसरे देश मेें जा रहे हैं।
सकारात्मक सोच के साथ युवा अपने देश की प्रगति के लिए कार्य करते हैं। बस उन्हें सही रास्ता और गार्गदर्शन की
जरूरत होती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि किसी भी देश की उन्नति और प्रगति उनकी युवा ब्रिगेड की बदौलत होती
है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर हर देश में युवाओं की भूमिका और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे
बढऩे की जरूरत है।

Friday, March 14, 2014

हर दिन बढ़ते हैं पहाड़ पर बसे आदासा के गणपति बप्‍पा

अगर मुझे किसी शहर में जाने का मौका मिलता है तो वहां के पर्यटन स्थलों की जानकारी जरूर रखती हूं। पिछले सप्ताह मुझे किसी काम से दो दिन के लिए नागपुर जाना पड़ा। वहां से हम कलमेश्वर गए जो नागपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। हमें बताया गया कि यहां से 15 किमी दूर एक गणेश मंदिर है जहां गणेश भगवान की विशालकाय प्रतिमा है। कहते हैं कि यहां दर्शन करने से गणपति अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरा करते हैं। तो हम चार-पांच लोग बाइक और स्कूटी से दोपहर 12 बजे अदासा के गणपति के दर्शन के लिए चल दिए। रास्ते में कई उतार-चढ़ाव मिले, पर थकान महसूस नहीं हुई। प्रकृति सौंदर्य को निहारते और सफेद चादर सी फैली कपास को देखना बेहद खूबसूरत लग रहा था। हरियाली के बीच पहाड़ों पर बसे हैं गणपति बप्पा। रास्ते में पडऩे वाले कहीं धूप तो कहीं छांव के बीच दूर से दिखते पहाड़ सोने से चमकते तो कहीं बादलों में सट जाते। प्रकृति के आंचल में बसे गणपति के पास पहुंचकर काफी शांति मिलती है। पहाड़ों के बीच एक छोटा सा गांव है जिसका नाम है आदासा। यहां अनेक प्राचीन और शानदार मंदिर देखे जा सकते हैं। अदासा गणपति की महिमा ऐसी है कि भक्त या पयर्टक अपने आप इस ओर खिचें चले आते हैं। कलमेश्वर से 15 किमी दूर आदासा के  गणेश मंदिर में गणपति स्वयंभू है। जिन्हें शमी विध्नेश्वर भी कहा जाता है। क्योंकि गणपति शमी के पेड़ से निकले हैं। नागपुर के आदासा गणपति के दर्शन कर भक्तों का जीवन धन्य हो जाता है। आदासा गणपति की ये प्रतिमा पहले बहुत छोटी थी। अब करीब 11 फीट ऊंची और 7 फीट चौड़ी है और एक ही पत्थर से निर्मित है। बताया जाता है कि गणपति चावल के आकार के समान रोज बढ़ते हैं। यह हिंदू धर्म का एक बड़ा केंद्र है जो पौष के महीने में तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करता है। हम आदासा में लगभग दो-ढाई घंटे रुके। मन तो कुछ देर और रुकने का था, लेकिन हमारी ट्रेन नागपुर से शाम में थी। इसलिए हमलोग दर्शन के बाद वहां का प्रसिद्ध पानी-पूरी खाकर जल्दी लौट आए। यहां लोग अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने भी आते हैं। मंदिर परिसर में काफी भीड़ रहती है। बच्चों के लिए झूले लगे हैं। मंदिर के आसपास हरियाली है और मंदिर पीछे एक गांव भी है। आदासा गणपति की महिमा ही कुछ ऐसी है कि भक्त बरबस इस ओर खिचें चले आते हैं। मंदिर परिसर के कई दुकान है जहां बाप्पा को चढ़ाने के लिए एक थाल में नारियल, फूल, माला, अबीर, सिंदूर  और दूर्वा मिलता है। मंदिर में नारियल चढ़ाने के बाद मंदिर के बाहर तोड़ा जाता है।
वामन पुराण के अनुसार जब वामन रूप में भगवान विष्णु राजा बलि के पास पहुंचे उससे पहले उन्होंने आदासा गांव के इसी स्थान पर भगवान गणेश की आराधना की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने शमि के वृक्ष से प्रकट होकर भगवान वामन को दर्शन देकर अपना आशीर्वाद दिया और इसलिए गणपति को यहां शमी गणेश के नाम से भी पुकारा जाने लगा। वसंत पंचमी पर भगवान गणेश उत्सव मनाया जाता है। उस समय देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां उमड़ पड़ते हैं। आदासा के समीप ही एक पहाड़ी में तीन लिंगों वाला भगवान शिव को समर्पित मंदिर बना हुआ है। माना जाता है कि इस मंदिर के लिंग अपने आप भूमि से निकले थे।

Thursday, March 13, 2014

राजस्थान का बेस्ट डेस्टिनेशन है अलवर, जहां घूमने को है बहुत कुछ

अलवर का राजस्थान के पर्यटन स्थलों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। अलवर ऐतिहासिक इमारतों से भरा पड़ा है। अलवर अरावली की पहाडिय़ों के मध्य में बसा है। अलवर का प्राचीन नाम 'शाल्वपुरÓ था। अलवर में 14वीं शताब्दी में निर्मित मकबरा और कई प्राचीन मस्जिदें स्थित हैं। नयनाभिराम सिलिसर्थ झील के किनारे स्थित महल में एक संग्रहालय है, जिसमें हिन्दी, संस्कृत और फारसी पांडुलिपियां तथा राजस्थानी व मुगल लघु चित्रों का संग्रह रखा गया है। यहां के अन्य दर्शनीय स्थलों में प्रसिद्ध सरिस्का बाघ अभयारण्य शामिल है। अलवर सुंदर झीलों, भव्य महलों, शानदार मंदिरों, शानदार स्मारकों और विशाल किलों के लिए प्रसिद्ध है। अलवर का सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

अलवर के दर्शनीय स्थान-

नीमराना फोर्ट पैलेस 
राजस्थान के शहर अलवर में कई पर्यटन स्थलों में से एक है। सन् 1464 में स्थापित नीमराना फोर्ट पैलेस देश के कुछ प्राचीनतम हेरिटेज रिजॉर्ट्स में से एक है। पृथ्वीराज चौहान तृतीय की तीसरी राजधानी नीमराना किला दिल्ली जयपुर हाइवे पर स्थित है और 25 एकड़ क्षेत्र में फैला है। दस लेवल पर बना यह भव्य किला बाहर से देखने में मनमोहक है, लेकिन किला के अंदर से बाहर का नजारा उससे भी अधिक आकर्षक लगता है। राजस्थान के अलवर जिले में अरावली क्षेत्र के नीमराना गांव में स्थित यह किला पर्यटकों को आकर्षित करता है।

सिटी पैलेस
सिटी पैलैस परिसर अलवर के पूर्वी छोर की शान है। सिटी पैलैस के ऊपर अरावली की पहाडिय़ां हैं जिन पर बाला किला बना है। सिटी पैलेस परिसर बहुत ही ख़ूबसूरत है और इसके साथ-साथ बालकॉनी की योजना है।

बाला किला 
बाला किले की दीवार पूरी पहाड़ी पर फैली हुई है जो हरे-भरे मैदानों से गुजरती है। पूरे अलवर शहर में यह सबसे पुरानी इमारत है, जो लगभग 928 ई. में निकुम्भ राजपूतों द्वारा बनाई गई थी।

फतहगंज का मकबरा
अलवर में फतहगंज का मकबरा पांच मंजिला है। फतहगंज का मकबरा दिल्ली में स्थित अपनी समकालीन सभी इमारतों में सच्से उच्च कोटि का है। ख़ूबसूरती के मामले में यह हुमायंू के मकबरे से भी सुंदर है।

भर्तृहरि का मंदिर
यह अलवर शहर से 32 किमी दूर जयपुर अलवर मार्ग पर स्थित है। हरी-भरी अरावली पर्वत शृंखलाओं की तलहटी में स्थित भर्तृहरि का मंदिर। भर्तृहरि धाम लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।

सरिस्का
राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाडिय़ों पर 800 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला सरिस्का मुख्य रूप से वन्य जीव अभयारण्य और टाइगर रिजर्व के लिए प्रसिद्ध है। अलवर के सरिस्का की गिनती भारत के जाने माने वन्य जीव अभयारण्यों में की जाती है। इसके अलावा इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व भी है।

सिलीसेढ़ झील
यह एक प्राकृतिक झील है। यह झील दिल्ली-जयपुर मार्ग पर अलवर से 12 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित है। सिलीसेढ़ झील अलवर की सबसे प्रसिद्ध और सुंदर झील है। इसका निर्माण महाराव राजा विनय सिंह ने 1845 में करवाया था। झील के चारों ओर हरी-भरी पहाडिय़ां और आसपास के मनारेम दृश्य को देखा जा सकता है।

दूरी
अलवर जयपुर से 148 किमी. और दिल्ली से 156 किमी. दूर है। जयपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 8 द्वारा शाहपूरा और अमेर होते हुए अलवर पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 8 द्वारा धारूहेडा और मानेसर होते हुए अलवर पहुंचा जा सकता है।

घूमने का सही समय
अलवर घूमने के लिए सच्से अच्छा मौसम अक्टूबर से मार्च का है। उस समय अलवर की सौंदर्य देखने लायक होता है।

कैसे पहुंचे 
वायु मार्ग-अलवर के सबसे नजदीक हवाई अड्डा सांगनेर है।
रेल मार्ग-रेलमार्ग द्वारा आसानी से अलवर पहुंचा जा सकता है।
सडक मार्ग-अलवर के राजस्थान के सभी शहरों और भारत के सभी राज्यों से सड़कमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

ठहरने का स्थान 
अलवर में रूकने के लिए सस्ते और मंहगे होटल हैं जहां आप अपनी सुविधा के अनुसार रूक सकते हैं। 

Thursday, January 23, 2014

यह है मुंबई की शान, जहां पर्यटक आना चाहते हैं बार-बार

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंबई (पूर्व नाम बंबई) महाराष्ट्र की राजधानी है। भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर्यटकों को बहुत लुभाता है। मुंबई को भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। मुंबई भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित है। यह अरब सागर के सात द्वीपों का एक हिस्सा है, इसलिए इसे सात टापुओं का नगर भी कहा जाता है। मुंबई सामान्य रूप से सात द्वीपों जिनके नाम कोलाबा, माजागांव, ओल्ड वूमन द्वीप, वाडाला, माहीम, पारेल और माटूंगा-सायन पर स्थित है। पूरे साल सुहावना मौसम रहने के कारण पर्यटकों के लिए किसी समय भी घूमने के लिए मुंबई एकदम सही स्थान है।
गेटवे आफ इंडिया
गेटवे आफ इंडिया मुंबई का बहुत ही प्रसिद्ध स्थान है। यह अपोलो बंदर के समीप स्थित है। इसकी रूपरेखा जॉर्ज विटेट ने तैयार की थी। इस प्रवेशद्वार के पास ही पर्यटकों के समुद्र भ्रमण हेतु नौका-सेवा भी उपल्ब्ध है। मुंबई के कोलाबा में स्थित गेटवे ऑफ की उंचाई 26 मीटर (85 फीट) है। यही से एलिफेंटा द्वीप के लिए बोट चलती हैं। गेटवे आफ इंडिया को देखने के लिए लाखों लोग प्रतिवर्ष आते हैं।
हाजी अली
हाजी अली की दरगाह मुंबई के वर्ली तट के निकट स्थित एक छोटे से टापू पर स्थित है। यह दरगाह मुस्लिम और हिन्दू दोनों समुदायों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती हैं। यह मुंबई का महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल भी है। मुख्य सड़क से लगभग 400 मीटर की दूरी पर यह दरगाह एक छोटे से टापू पर बनाई गई है। दरगाह तक जाने के लिए मुख्य सड़क से एक सेतु बना हुआ हैं। पैदल-पथ दरगाह में जाने का एकमात्र रास्ता है। सेतु के दोनों ओर समुद्र होने के कारण यह रास्ता काफी मनोरम हो जाता है। सूर्यास्त के समय किनारे से देखे जाने पर दरगाह का दृश्य बहुत शानदार दिखाई देता है।
होटल ताज
मुंबई की कोलाबा में पांच सितारा होटल ताज महल स्थित है जो गेटवे ऑफ इंडिया के पास है। होटल ताज शहर की सबसे बड़ी पहचान और भारत के सर्वश्रेष्ठ होटलों में से एक है। इस होटल का निर्माण 1903 में जेएन टाटा ने करवाया था। ताज होटल को मुंबई की शान माना जाता है। यह होटल भी पर्यटकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
हेंगिग गार्डन
हैंगिंग गार्डन को फिरोजशाह मेहता गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। मालावार पहाड़ी के शीर्ष भाग पर स्थित इस गार्डन का निर्माण 1881 ई. में किया गया था। यह गार्डन तीन जलाशय के ऊपर बना हुआ है। गार्डन का विशेष आकर्षण जानवरों की आकृति में कटी ख़ूबसूरत झाडिय़ां है। इस गार्डन से अरब सागर के ऊपर सूर्यास्त का दृश्य बड़ा ही सुंदर दिखाई देता है।
जुहू चौपाटी
यह बीच मुंबई की सबसे प्रसिद्ध बीच है। यह मुंबई के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह बीच पर्यटन स्थल के रूप में भी काफी प्रसिद्ध है। यह बीच बहुत ही बड़ा है जो सेंटाक्रूज से लेकर वेली-पार्ले तक फैला हुआ है। शनिवार और रविवार के दिन बीच पर बहुत अधिक भीड़ रहती है। चौपाटी बीच पर सपेरे और झूले भी मिलते हैं। स्पेशल भेल-पूरी और चाट के लिए चौपाटी बहुत प्रसिद्ध है।
महालक्ष्मी मंदिर
मुंबई के सर्वाधिक प्राचीन धर्मस्थलों में से एक है महालक्ष्मी मंदिर। समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित यह मंदिर लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती तीनों देवियों की प्रतिमाएं एक साथ विद्यमान हैं। तीनों प्रतिमाओं को सोने के आभूषणों से सुसज्जित किया गया है। यहां आने वाले हर भक्तों को विश्वास होता है कि माता उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करेंगी। मंदिर का निर्माण सन 1831 में धाक जी दादाजी नाम के एक हिन्दू व्यापारी ने करवाया था। समुद्र किनारे होने के कारण हाजी अली से महालक्ष्मी मंदिर दिखाई देता है।
मरीन ड्राइव
मरीन ड्राइव एक सी के आकार का छह लेन अरब सागर तट के साथ कंक्रीट की सड़क है जिसका निर्माण 1920 में हुआ। मरीन ड्राइव अरब सागर के किनारे-किनारे नरीमन प्वाइंट से लेकर चौपाटी से होते हुए मालाबार हिल तक के क्षेत्र में है। मरीन ड्राइव के शानदार घुमाव पर लगी स्ट्रीट-लाइटें रात्रि के समय जगमाती हैं जिस कारण इसे क्वीन्स नैकलेस का नाम दिया गया है। रात्रि के समय ऊंचे भवनों से देखने पर मरीन ड्राइव बहुत बेहतरीन दिखाई देता है। दुनियाभर के अधिकतर पर्यटक मरीन ड्राइव पर चहलकदमी करते नजर आते हैं। यहां का खास आकर्षण समुद्र की उठती-गिरती लहरें है।
मुंबा देवी मंदिर
मुंबई में कई दर्शनीय स्थल है जिनमें से एक मुंबा देवी मंदिर है। मुंबई का नाम ही मराठी में मुंबा आई यानि मुंबा माता के नाम से निकला है। मुंबा देवी को समर्पित मंदिर चौपाटी की रेतीले तटों के निकट बाबुलनाथ में स्थित है। मुंबा देवी मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है। मंदिर में प्रतिदिन छ: बार आरती की जाती है। मंगलवार का दिन यहां शुभ माना जाता है। यहां मन्नत मांगने के लिए यहां रखे कठवा (लकड़ी) पर सिक्कों को कीलों से ठोका जाता है। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बहुत रहती है।
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को पहले विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से जाना जाता था। गॉथिक शैली में बना यह विशाल भवन किसी रेलवे स्टेशन की बजाय एक महल जैसा दिखता है। इसका डिजाइन फ्रेडेरिक स्टीवंस ने तैयार किया था और 1887 में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ। इस भवन को बंदर, मोर और सिंह की मूर्तियों के साथ विभिन्न आकार के गुंबद, मीनारें और रंगीन शीशे वाली खिड़कियों से सजाया गया है। भवन के सामने बीच में रानी विक्टोरिया की बड़े आकार की मूर्ति लगी हुई है। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस अपने लघु नाम वी.टी. या सी.एस.टी. से अधिक प्रचलित है। 2004 को इस स्टेशन को युनेस्को की विश्व धरोहर समिति द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु
बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु (आधिकारिक राजीव गांधी सागर सेतु) 8-लेन का तार-समर्थित कांक्रीट से निर्मित पुल है। यह बांद्रा को मुंबई के पश्चिमी और दक्षिणी (वर्ली) उपनगरों से जोड़ता है और यह पश्चिमी-द्वीप महामार्ग प्रणाली का प्रथम चरण है। इस पुल का उद्घाटन 30 जून, 2009 को किया गया, लेकिन जन साधारण के लिए इसे 1 जुलाई, 2009 को मध्य-रात्रि से खोला गया। साढ़े पांच किलोमीटर लंबे इस पुल के बनने से बांद्रा और वर्ली के बीच यात्रा में लगने वाला समय 45 मिनट से घटकर मात्र 6-8 मिनट रह गया है। यह सेतु मुंबई और भारत में अपने प्रकार का प्रथम पुल है।

इन गलियों और चौराहों की पैदल करें सैर

कई लोग पैदल सैर करना पंसद करते हैं। अगर बात घूमने की हो तो क्या कहना है। आप पैदल घूमना चाहते हैं तो दिल्ली में ऐसी जगहों की कमी नहीं है। हम आपको बताते हैं कि आप कहां-कहां पैदल यात्रा कर सकते हैं। भारत की राजधानी दिल्ली अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, उद्यानों और बाजारों के लिए मशहूर है। दिल्ली में स्थित कई ऐतिहासिक किला मुगलकालीन वास्तुकला की नायाब धरोहर है। दिल्ली के कुछ जगहों पर आप वॉकिंग टूर का आनंद ले सकते हैं। दिल्ली की संस्कृति, कला और प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए पर्यटक कई गलियों, चौराहों और गार्डन में घूमते हैं। इन जगहों पर आप पैदल सैर कर मजा ले सकते हैं। पेश है कुछ मुख्य जगह:-
1.चांदनी चौक
चांदनी चौक दिल्ली का पुराना शहर है जो आज भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है। तंग गलियां होने के बावजूद वह आज भी लोगों को लुभाता है। लाल किले के पास स्थित चांदनी चौक पुरानी दिल्ली का एक प्रमुख बाजार है। दिल्ली यात्रा पर आए हर कोई चांदनी चौक की सैर करना चाहता है। यह दिल्ली के थोक व्यापार का प्रमुख केंद्र है। यह मुगल काल में प्रमुख व्यवसायिक केंद्र था। इसका डिजाइन शाहजहां की पुत्री जहांआरा बेगम ने बनाया था। यहां की गलियां संकरी हैं, इसलिए यहां लोग पैदल घूमने पसंद करते हैं। चांदनी चौक एक ऐसी जगह है जहां सभी धर्मो के स्तंभ दिगंबर जैन मंदिर, प्राचीन गौरी शंकर मंदिर, बैपटिस्ट चर्च, शीशगंज गुरुद्वारा और सुनहरी मस्जिद हैं। अगर खाने के शौकीन हैं तो पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक के पास ही परांठेवाली गली है। इसके अलावा यह अपनी खान पान की विभिन्न दुकानो के कारण काफी प्रसिद्ध है।
2.कुतुब मीनार
दक्षिण दिल्ली के महरौली भाग में स्थित कुतुब मीनार ईंट से बनी विश्व की सबसे ऊंची मीनार है। इसकी ऊंचाई 72.5 मीटर है जो ऊपर जाकर शिखर पर 2.75 मीटर हो जाता है। इसमें 379 सीढिय़ां हैं। मीनार के चारों ओर बने आहाते में भारतीय कला के कई उत्कृष्ट नमूने हैं। यह परिसर युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में स्वीकृत किया गया है। महरौली टूर के दौरान शहर के शोर-शाराबे से दूर ऐतिहासिक स्मारकों, कब्रों, रंगीन बाजारों और शानदार कुतुब मीनार देखने के लिए पैदल यात्रा करना सही होगा।
3. लोधी गार्डन
लोधी गार्डन सफदरजंग के मकबरे से 1 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। पहले इस बाग का नाम लेडी विलिंगटन पार्क था। यहां के खूबसूरत फव्वारे, तालाब, फूल और जॉगिंग ट्रैक सभी उम्र के लोगों को लुभाते हैं। यहां पेड़ों की विभिन्न प्रजातियां, रोज गार्डन और ग्रीन हाउस है जहां पौधों को रखा जाता है। पूरे वर्ष यहां अनेक प्रकार के पक्षी देखे जा सकते हैं। बगीचे के बीच में बड़ा गुंबद नामक मकबरा है, जिसके पीछे एक मस्जिद है जो 1494 में बनाई गई थी। इस उद्यान में शीश गुंबद, मोहम्मद शाह का मकबरा और सिकंदर लोदी का मकबरा भी हैं। सर्दियों के दिनों में यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। यह 90 एकड़ में फैला हुआ है।
4. जामा मस्जिद
जामा मस्जिद दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद है। जामा मस्जिद का निर्माण 1656 में सम्राट शाहजहां ने किया था। यह पुरानी दिल्ली में स्थित है। यह मस्जिद लाल और संगमरमर के पत्थरों का बना हुआ है। मस्जिद के गुंबदों पर कबूतरों का बैठना और नजदीक से उन्हें देखना काफी लुभाता है। दिल्ली के चावड़ी बाजार में स्थित जामा मस्जिद के पास मीना बाजार है। जामा मस्जिद के एक छोर से लाल किला का खूबसूरत नजारा दिखता है। दूसरी तरफ चांदनी चौक बाजार है।


 5.कनॉट प्लेस
कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यवसायिक केंद्र है। इसका नाम ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था। इस मार्केट का डिजाइन डब्यू एच निकोल और टॉर रसेल ने बनाया था। यह मार्केट अपने समय की भारत की सबसे बड़ी मार्केट थी। अपनी स्थापना के 65 साल बाद भी यह दिल्ली में खरीदारी का प्रमुख केंद्र है। यहां के इनर सर्किल में लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड के कपड़ों के शोरूम, रेस्टोररेंट और बार हैं।
 6.प्रगति मैदान


प्रगति मैदान में एशिया की सबसे बड़ी ऑटो प्रदर्शनी ऑटो एक्स्पो आयोजित होता है। प्रगति मैदान दिल्ली स्थित बड़े प्रदर्शिनियों का परिसर है। पूरा परिसर छोटे छोटे प्रदर्शनी हॉल में विभाजित है। यह परिसर खासकर हर साल लगने वाले विश्व पुस्तक मेला और इंटरनेशनल ट्रेड फेयर के लिए मशहूर है। नई दिल्ली के भैरों मार्ग पर प्रगति मैदान परिसर में शिल्प संग्रहालय स्थित है। यह दिल्ली के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। विश्व भर के लाखों पर्यटक यहां भारत की परंपरागत शिल्प एवं कलाओं का सजीव अवलोकन करने आते हैं।

Thursday, December 12, 2013

यह है पर्यटकों के लिए छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख आकर्षण केंद्र


छत्तीसगढ़ अपनी मनोरम छठा से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा था। छत्तीसगढ़  में आदिवासी सभ्यता और संस्कृति आज भी कायम है जिनको करीब से जानने और देखने के लिए विदेशी भारत आते हैं। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, पुरातात्विक स्थलों, झरने, प्राचीन गुफाओं और वन्यजीव पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित है। मध्य प्रदेश के सोलह दक्षिण पूर्वी क्षेत्रों को विभाजित करके 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ। प्राचीन काल में इस क्षेत्र को दक्षिण कौशल  के नाम से जाना जाता था। छत्तीसगढ़ तो वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न  संस्कृतियों के विकास का केंद्र रहा है। आइए नजर डाालते हैं छत्तीसगढ़ के प्रमुख पांच आकर्षण केंद्रों पर जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।


चित्रकोट फॉल्स (चित्रकोट जलप्रपात)
खूबसूरत राज्य छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से 39 किमी दूर इंद्रावती नदी पर  चित्रकोट जलप्रपात बनता है। अपने घोड़े की नाल समान मुख के कारण इस जल प्रपात को भारत का निआग्रा भी कहा जाता है। दुनियाभर से इस चित्रकोट को देखने के लिए लाखों पर्यटक आते हैं। बरसात के मौसम में मिट्टी के कटाव के कारण भूरे रंग के छाया में आश्चर्यजनक सुंदर लगता है, जबकि गर्मियों में झरना क्रिस्टल रंग में स्पष्ट दिखाई देता है। चित्रकोट जलप्रपात का मनोरम दृश्य भव्य और शानदार है।


इंद्रावती नेशनल पार्क 
इंद्रावती नेशनल पार्क छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय और सबसे मुख्य वन्यजीव उद्यानों में से एक माना जाता है। 1983 में इस पार्क को टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित किया है और जल्द ही भारत के सबसे मशहूर बाघ अभयारण्यों में से एक बन गया। अभयारण्य में तेंदुए, बंगाल टाइगर, स्लॉथ बीयर, जंगली कुत्ता, चार सींग वाले मृग, धारीदार हाइना और कई विलुप्त प्रजातियों के जानवर रहते हैं।

भोरमदेव मंदिर 
छत्तीसगढ़ के कवर्धा शहर में स्थित भोरमदेव मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। भोरमदेव मंदिर को नाग राजवंश के राजा रामचंद्र लगभग 7 से 11 वीं शताब्दी तक की अवधि में बनाया गया था। भोरमदेव मंदिर में खजुराहो मंदिर की झलक दिखाई देती है, इसलिए इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है। भोरमदेव मंदिर पर नृत्य की आकर्षक भाव भंगिमाएं के साथ-साथ हाथी, घोड़े, भगवान गणेश एवं नटराज की मूर्तियां चंदेल शैली में उकेरी गई हैं। भोरमदेव महोत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पयर्टक इकट्ठा होते हैं। ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व को स्थानीय कलाकार की अपनी प्रतिभा के जरिए लोगों को साझा करते हैं।

कांकेर 
छत्तीसगढ़ के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित कांकेर जिले में कई रमणीय पर्यटक स्थल है। कांकेर पैलेस, झरना, जंगल, विभिन्न प्रकार के लकड़ी, गडिय़ा पर्वत और लकड़ी आदि के आकर्षणों के कारण कांकेर की ओर पर्यटक तेजी से उभर रहा है। सुंदर आदिवासी गांवों की संस्कृति और लकड़ी के नक्काशी वाले हस्तशिल्प व बांस की वस्तुओं की कलाकृतियां कांकेर की पहचान है। 12 वीं सदी में कांकेर पैलेस में शाही परिवार से रहते थे। महल के कुछ हिस्सों को एक होटल में तब्दील कर दिया गया है।

कोटमसर गुफा 
संभाग मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान में कोटमसर गुफा स्थित है। विश्व की सबसे लंबी इस गुफा की लंबाई 4500 मीटर है। चूना पत्थर के घुलने से बनी ये गुफाएं चूनापत्थर के जमने से बनी संरचनाओं के कारण प्रसिद्ध है। पाषाणयुगीन सभ्यता के चिन्ह आज भी यहां मिलते हैं। कोटमसर की गुफा अपने प्रागैतिहासिक अवशेषों, अद्भुत प्राकृतिक संरचनाओं और  विस्मयकारी सुंदरता के लिए मशहूर है। कोटमसर गुफा पर्यटकों के लिए नवंबर में खोल दिया जाता है।