यह सड़क सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं है। यह पटना की रोजमर्रा की जिंदगी का एक चलता-फिरता हिस्सा है। कोई अपनी फाइल लेकर जा रहा है, किसी को दफ्तर पहुंचने की जल्दी है, कोई किसी अधिकारी से मिलने की उम्मीद में है। हर चेहरे के पीछे एक काम है, हर वाहन के पीछे कोई जिम्मेदारी और हर सुबह के पीछे एक नई शुरुआत। हर कदम के पीछे एक जरूरत और हर सुबह के पीछे एक नई उम्मीद।
हाईकोर्ट और इनकम टैक्स के बीच आने वाला विद्युत भवन इस तस्वीर को और खास बनाता है। सुबह होते ही यहां विभागीय गाड़ियों की आवाजाही बढ़ जाती है। कर्मचारी पहुंचने लगते हैं, अधिकारी आते हैं और दूर-दराज से अपने काम के लिए आए लोग संबंधित विभागों का पता पूछते नजर आते हैं। किसी के हाथ में आवेदन है, किसी के पास पुरानी फाइल और किसी की आंखों में अपने काम के पूरा होने की उम्मीद।
सड़क पर दौड़ती सरकारी गाड़ियों को देखकर शायद ही कोई रुककर सोचता हो कि उनमें बैठा हर व्यक्ति भी अपने साथ एक कहानी लेकर चल रहा है। किसी को किसी फाइल पर काम करना है, किसी को शिकायत लेकर विभाग पहुंचना है, तो कोई दिनभर की जिम्मेदारियों के बीच शाम को घर लौटने की राह देख रहा है। यही छोटे-छोटे सफर मिलकर शहर की बड़ी कहानी बनाते हैं।
और फिर मन अनायास कुछ दशक पीछे चला जाता है। यही रास्ता तब इतना शोरभरा नहीं था। साइकिल और रिक्शों की धीमी रफ्तार थी। सड़क के किनारे पुराने पेड़ थे, जिनकी छांव में लोग कुछ पल ठहर जाते थे। दुकानें छोटी थीं, और शहर की रफ्तार भी कुछ कम थी। शायद लोगों के पास एक-दूसरे को देखने और पहचानने का थोड़ा ज्यादा वक्त था। और जिंदगी में इतनी जल्दबाजी भी नहीं थी।
आज वही रास्ता तेज है। गाड़ियां ज्यादा हैं, इमारतें बदल गई है और लोगों के पास समय कम है। मगर कुछ चीजें अब भी वैस ही है- सुबह की चाय की खुशबू, पेड़ों की छांव और रोज एक ही रास्ते से गुजरते अनगिनत चेहरे।
हाईकोर्ट से विद्युत भवन और फिर इनकम टैक्स तक दौड़ती सरकारी गाड़ियां दरअसल सिर्फ दफ्तरों के बीच नहीं दौड़तीं। वे पटना की उस जिंदगी का हिस्सा हैं, जिसमें हर सुबह कोई अपना काम लेकर निकलता है और शाम को अपने घर लौटने की उम्मीद साथ लेकर चलता है।
एक ही सड़क पर कितनी जिंदगियां एक-दूसरे से गुजरती हैं, मगर शायद ही कभी एक-दूसरे की कहानी जान पाती हैं। यही इस रास्ते की खूबसूरती है-एक रास्ता, हजार चेहरे और हर चेहरे की अपनी एक कहानी।
शहर बदलता रहा, सड़क की रफ्तार बदलती रही, लेकिन इस रास्ते से गुजरती जिंदगी ने पटना की कहानी को हर सुबह एक नए पन्ने के साथ आगे बढ़ाया है।


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