Friday, March 14, 2014

हर दिन बढ़ते हैं पहाड़ पर बसे आदासा के गणपति बप्‍पा

अगर मुझे किसी शहर में जाने का मौका मिलता है तो वहां के पर्यटन स्थलों की जानकारी जरूर रखती हूं। पिछले सप्ताह मुझे किसी काम से दो दिन के लिए नागपुर जाना पड़ा। वहां से हम कलमेश्वर गए जो नागपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। हमें बताया गया कि यहां से 15 किमी दूर एक गणेश मंदिर है जहां गणेश भगवान की विशालकाय प्रतिमा है। कहते हैं कि यहां दर्शन करने से गणपति अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरा करते हैं। तो हम चार-पांच लोग बाइक और स्कूटी से दोपहर 12 बजे अदासा के गणपति के दर्शन के लिए चल दिए। रास्ते में कई उतार-चढ़ाव मिले, पर थकान महसूस नहीं हुई। प्रकृति सौंदर्य को निहारते और सफेद चादर सी फैली कपास को देखना बेहद खूबसूरत लग रहा था। हरियाली के बीच पहाड़ों पर बसे हैं गणपति बप्पा। रास्ते में पडऩे वाले कहीं धूप तो कहीं छांव के बीच दूर से दिखते पहाड़ सोने से चमकते तो कहीं बादलों में सट जाते। प्रकृति के आंचल में बसे गणपति के पास पहुंचकर काफी शांति मिलती है। पहाड़ों के बीच एक छोटा सा गांव है जिसका नाम है आदासा। यहां अनेक प्राचीन और शानदार मंदिर देखे जा सकते हैं। अदासा गणपति की महिमा ऐसी है कि भक्त या पयर्टक अपने आप इस ओर खिचें चले आते हैं। कलमेश्वर से 15 किमी दूर आदासा के  गणेश मंदिर में गणपति स्वयंभू है। जिन्हें शमी विध्नेश्वर भी कहा जाता है। क्योंकि गणपति शमी के पेड़ से निकले हैं। नागपुर के आदासा गणपति के दर्शन कर भक्तों का जीवन धन्य हो जाता है। आदासा गणपति की ये प्रतिमा पहले बहुत छोटी थी। अब करीब 11 फीट ऊंची और 7 फीट चौड़ी है और एक ही पत्थर से निर्मित है। बताया जाता है कि गणपति चावल के आकार के समान रोज बढ़ते हैं। यह हिंदू धर्म का एक बड़ा केंद्र है जो पौष के महीने में तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करता है। हम आदासा में लगभग दो-ढाई घंटे रुके। मन तो कुछ देर और रुकने का था, लेकिन हमारी ट्रेन नागपुर से शाम में थी। इसलिए हमलोग दर्शन के बाद वहां का प्रसिद्ध पानी-पूरी खाकर जल्दी लौट आए। यहां लोग अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने भी आते हैं। मंदिर परिसर में काफी भीड़ रहती है। बच्चों के लिए झूले लगे हैं। मंदिर के आसपास हरियाली है और मंदिर पीछे एक गांव भी है। आदासा गणपति की महिमा ही कुछ ऐसी है कि भक्त बरबस इस ओर खिचें चले आते हैं। मंदिर परिसर के कई दुकान है जहां बाप्पा को चढ़ाने के लिए एक थाल में नारियल, फूल, माला, अबीर, सिंदूर  और दूर्वा मिलता है। मंदिर में नारियल चढ़ाने के बाद मंदिर के बाहर तोड़ा जाता है।
वामन पुराण के अनुसार जब वामन रूप में भगवान विष्णु राजा बलि के पास पहुंचे उससे पहले उन्होंने आदासा गांव के इसी स्थान पर भगवान गणेश की आराधना की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने शमि के वृक्ष से प्रकट होकर भगवान वामन को दर्शन देकर अपना आशीर्वाद दिया और इसलिए गणपति को यहां शमी गणेश के नाम से भी पुकारा जाने लगा। वसंत पंचमी पर भगवान गणेश उत्सव मनाया जाता है। उस समय देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां उमड़ पड़ते हैं। आदासा के समीप ही एक पहाड़ी में तीन लिंगों वाला भगवान शिव को समर्पित मंदिर बना हुआ है। माना जाता है कि इस मंदिर के लिंग अपने आप भूमि से निकले थे।

Thursday, March 13, 2014

राजस्थान का बेस्ट डेस्टिनेशन है अलवर, जहां घूमने को है बहुत कुछ

अलवर का राजस्थान के पर्यटन स्थलों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। अलवर ऐतिहासिक इमारतों से भरा पड़ा है। अलवर अरावली की पहाडिय़ों के मध्य में बसा है। अलवर का प्राचीन नाम 'शाल्वपुरÓ था। अलवर में 14वीं शताब्दी में निर्मित मकबरा और कई प्राचीन मस्जिदें स्थित हैं। नयनाभिराम सिलिसर्थ झील के किनारे स्थित महल में एक संग्रहालय है, जिसमें हिन्दी, संस्कृत और फारसी पांडुलिपियां तथा राजस्थानी व मुगल लघु चित्रों का संग्रह रखा गया है। यहां के अन्य दर्शनीय स्थलों में प्रसिद्ध सरिस्का बाघ अभयारण्य शामिल है। अलवर सुंदर झीलों, भव्य महलों, शानदार मंदिरों, शानदार स्मारकों और विशाल किलों के लिए प्रसिद्ध है। अलवर का सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

अलवर के दर्शनीय स्थान-

नीमराना फोर्ट पैलेस 
राजस्थान के शहर अलवर में कई पर्यटन स्थलों में से एक है। सन् 1464 में स्थापित नीमराना फोर्ट पैलेस देश के कुछ प्राचीनतम हेरिटेज रिजॉर्ट्स में से एक है। पृथ्वीराज चौहान तृतीय की तीसरी राजधानी नीमराना किला दिल्ली जयपुर हाइवे पर स्थित है और 25 एकड़ क्षेत्र में फैला है। दस लेवल पर बना यह भव्य किला बाहर से देखने में मनमोहक है, लेकिन किला के अंदर से बाहर का नजारा उससे भी अधिक आकर्षक लगता है। राजस्थान के अलवर जिले में अरावली क्षेत्र के नीमराना गांव में स्थित यह किला पर्यटकों को आकर्षित करता है।

सिटी पैलेस
सिटी पैलैस परिसर अलवर के पूर्वी छोर की शान है। सिटी पैलैस के ऊपर अरावली की पहाडिय़ां हैं जिन पर बाला किला बना है। सिटी पैलेस परिसर बहुत ही ख़ूबसूरत है और इसके साथ-साथ बालकॉनी की योजना है।

बाला किला 
बाला किले की दीवार पूरी पहाड़ी पर फैली हुई है जो हरे-भरे मैदानों से गुजरती है। पूरे अलवर शहर में यह सबसे पुरानी इमारत है, जो लगभग 928 ई. में निकुम्भ राजपूतों द्वारा बनाई गई थी।

फतहगंज का मकबरा
अलवर में फतहगंज का मकबरा पांच मंजिला है। फतहगंज का मकबरा दिल्ली में स्थित अपनी समकालीन सभी इमारतों में सच्से उच्च कोटि का है। ख़ूबसूरती के मामले में यह हुमायंू के मकबरे से भी सुंदर है।

भर्तृहरि का मंदिर
यह अलवर शहर से 32 किमी दूर जयपुर अलवर मार्ग पर स्थित है। हरी-भरी अरावली पर्वत शृंखलाओं की तलहटी में स्थित भर्तृहरि का मंदिर। भर्तृहरि धाम लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।

सरिस्का
राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाडिय़ों पर 800 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला सरिस्का मुख्य रूप से वन्य जीव अभयारण्य और टाइगर रिजर्व के लिए प्रसिद्ध है। अलवर के सरिस्का की गिनती भारत के जाने माने वन्य जीव अभयारण्यों में की जाती है। इसके अलावा इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व भी है।

सिलीसेढ़ झील
यह एक प्राकृतिक झील है। यह झील दिल्ली-जयपुर मार्ग पर अलवर से 12 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित है। सिलीसेढ़ झील अलवर की सबसे प्रसिद्ध और सुंदर झील है। इसका निर्माण महाराव राजा विनय सिंह ने 1845 में करवाया था। झील के चारों ओर हरी-भरी पहाडिय़ां और आसपास के मनारेम दृश्य को देखा जा सकता है।

दूरी
अलवर जयपुर से 148 किमी. और दिल्ली से 156 किमी. दूर है। जयपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 8 द्वारा शाहपूरा और अमेर होते हुए अलवर पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 8 द्वारा धारूहेडा और मानेसर होते हुए अलवर पहुंचा जा सकता है।

घूमने का सही समय
अलवर घूमने के लिए सच्से अच्छा मौसम अक्टूबर से मार्च का है। उस समय अलवर की सौंदर्य देखने लायक होता है।

कैसे पहुंचे 
वायु मार्ग-अलवर के सबसे नजदीक हवाई अड्डा सांगनेर है।
रेल मार्ग-रेलमार्ग द्वारा आसानी से अलवर पहुंचा जा सकता है।
सडक मार्ग-अलवर के राजस्थान के सभी शहरों और भारत के सभी राज्यों से सड़कमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

ठहरने का स्थान 
अलवर में रूकने के लिए सस्ते और मंहगे होटल हैं जहां आप अपनी सुविधा के अनुसार रूक सकते हैं।