Tuesday, April 30, 2013

एक छोटी सी कहानी


एक साधारण सी लड़की हर बड़े-छोटे शहर में कही भी कुछ हालत से कुछ खुद से उलझी। रंग गेहुआ सा। उम्र वहीं कोई बीस बाइस साल। यौवन पर चढ़ाव, मन कोमल सा। भोली-भाली सी सुरत, आंखें सुखे झील सा। दिखे जैसे वसंत में खिले सरसों सा। पर उसके अंदर ऐसा हुक था जो जान सका न कोई। कहीं खौफ था वजूद खोने का। मानो जैसे खो ही गया था उसका वजूद। कुछ साल पहले दोस्तों के जिदंगी को देख बचपन में लगी चोट आंखों में सिमट गया था, भूलकर भी कभी प्यार न करने को तय किया था। भागमभाग वाली शहर में न जाने
कहां से जिदंगी को सुकुन मिला। कई दफा तो ऐसा लगा मायावी दुनिया का माया तो नहीं। इनसानी जद्दोजहद के गहरे एहसास पिघलकर उसके सीने में उतरता। फिर भी उसकी तलाश खत्म नहीं होती है। उसके सीने में भटकाव का तपिश थी, जो छोटे शहर से खिंचते हुए वहां तक लाया था। उसको जाना है जिदंगी में बहुत दूर तक। अभी तक वह अकेली चली पर अब क्यों लगता है उसको दोस्त की जरूरत है जिसके लिए अचानक रास्ता बदल शहर आ गई थी। वह था साथ-साथ हमेशा उसकेलड़की को महसूस होता था, लेकिन वह चुप थी उसके इंतजार में। कुछ दिन उसकी इंतजार खत्म हुई। एक-दूसरे को प्यार करने लगे, दिन में साथ-साथ रहते पर बातें कम करने लगे, दूर जाते तब उनकी बातें व उनकी आंखों में दिखता अपनापन याद आने लगा। हंसी और पल भर का गुस्सा!! इस लफ्ज के मायने हैं उसके लिए। उसके हंसी चेहरे पर गम कभी दिखती नहीं, अपनों पर उसका गुस्सा पल भर का रहता बहुतों में वह अलग दिखती जिसकी विश्वास उसकी जिदंगी बन गई। वह हर पल उसका होता गया और खुशबू की बयां करने की तलब बढ़ती गई। उनके बीच खास लगाव थी
क्योंकि दोनों की प्यार दूर  होते हुए भी जज्बाती थी और साथ था रिश्तों का विश्वास। औरों से अलग-अलग दुनिया है उनके पास। फिर भी तरसते है मिलने को। न जाने कौन सा प्यार है जिसको खुदा मानते है क्योंकि खुदा भी दूर रहते हुए एक-दूसरे के पास है। शायद इसलिए। अल्फाजों में बयान नहीं की जा सकती उनकी कहानी को। फिर भी .....................
सानो को देख नीर कभी सोचा न था सानो सिर्फ नीर की होना चाहती है। सानो जो अलग थी। उसकी आंखों में वह कशिश थी जो पाने को जी चाहता था। सानो सपना देखा करती थी मंजिल की ऊचाईयों को छूने का। मंजिल की सीढ़ी मिली उसे जाना पड़ा कही दूर सपनों को पूरा करने के लिए। नीर था दूर फिर भी उसके पास था। हर दिन बातें होती। दोनों के पास एक धरोहर था वह था उनकी दूरी। नीर को नौकरी मिली वह भी अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत करने लगा। मंजिल मिलता गया कारवां बनता गया न मिटा तो उसका अनुभव। उसकी जिदंगी की सबसे बड़ी खुशी थी कि उसको कोई चाहता है। नीर और सानो अनुभव करते है जीवन एक प्रतिध्वनि है। तुम जो करते हो तुम पर बरस जाता है जितना तुम्हारा प्रेम बढ़ता है उतना उन्हें साफ होने लगता है कि दूरी से कोई पराया नहीं होता, जिससे प्रेम हो जाता है उनसे परायापन मिट जाता है। सानो मानती है कि एक का दुख दूसरा अनुभव करता है। जो निर्मल होता है। सानो किसी ग्रुप में नौकरी करती थी, वहां का माहौल और लोगों से वाकिफ नहीं थी। नौकरी के दौरान लागों की स्टाइल, रहन-सहन और चाटुकरा देख सोचती काश मैं भी ........पर खामोश होकर सबकी हरकतें देखी और सोचती ऐसी ही दुनिया है जहां लोग अपने को लाइमलाइट करने के लिए दूसरों का सहारा लेते हैं। सानो के पास आत्मविश्वास और जोश की कमी नहीं, लेकिन वह इतनी भोली थी कोई भी अपना उल्लू सीधा कर लें। नीर हर उस माहौल से वाकिफ था जिसकी परछाई आइने में साफ झलकती है। वह कहता औरत/लड़की समाज की आइना है। हर माहौल को अच्छा खराब औरत बना सकती है। औरत यानि महिला देश की ऐसी ताकत हैं, जो पूरे दुनिया को इधर से उधर कर दे पर उसको किसी सहारे की नहीं सहानुभूति की जरूरत है। सानो ने भी एक सपना देखा कि समाज के परदे की पीछे की बदली तस्वीर को दिखाएंगी, लेकिन शायद उनकी जिदंगी में भी वहीं होने वाला है, जो औरों के साथ होता है !!!

Thursday, April 18, 2013

मूर्तिकला का नायाब नमूना-एलिफेंटा


कहते हैं मुंबई सपनों का शहर है। जो खूबसूरत वादियों, समंदर और बॉलीवुड सितारों से सदा जगमगाता रहता है। पिछले साल मुंबई दर्शन करने का मौका मिला। गेटवे आफ इंडिया से बोट पर सवार होकर हमलोग एलिफेंटा की गुफा देखने के लिए आगे बढ़े। समंदर के बीच स्टीमर और कई बड़ी जहाजों को दूर छोड़ गतव्य को आगे बढ़ते हुए नजारों को देख मन में कई तस्वीर नजर आने लगी। समंदर के चारों ओर फैली हरयाली, प्रकृति के खूबसूरत नजारे, आसमान के आसमानी रंगे, अरब सागर की नीली लहरों से अठखेलियां करती पक्षियां। क्या प्राकृतिक नजारे थे। अरब सागर के नीली लहरों के छलकते पानी के  बीच बर्फीली हवाओं का झोंका मन मनमोह लिया। एलिफेंटा गुफाएं इतिहास प्रेमियों के साथ ही देशी विदेशी पर्यटकों को भी समान रूप से आकर्षित करती हैं।

एलिफेंटा की गुफाएं कलात्मक कलाकूतियों की श्रृंखला है जो कि एलिफेंटा आईलैंड में स्थित है। इो सिटी आफ केव्य कहा जाता है। मुंबई के गेटवे आफ इंडिया से लगभग 12 किमी की दूरी पर अरब सागर में स्थित यह छोटा सा टापू है। यहां सात गुफाएं बनी हुई है जिनमें से मुख्य गुफा में 26 स्तंभ हैं। भगवान शिव के कई रूपों को उकेरा गया है। यहां भगवान शंकर की नौ बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ हैं। शिल्प दक्षिण भारतीय मूर्तिकला से प्रेरित है। मूर्मिकला के ये नायाब नमूने को यूनेस्को विश्व धराहर की सूची में 1987 में शामिल किया गया।

इतिहास:-
एलिफेंटा गुफाओं का ऐतिहासिक महत्व है। चारों ओर से समुद्र से घिरा यह टापू कभी घरापुरी के नाम से जाना जाता था। इसके निमार्ण की सदी को लेकर विशषकों में मतभेद है और माना जाता है कि छठी से लेकर आठवीं शताब्दी के मध्य भारतीय शिल्पकला का नमूना एलिफेंटा की गुफाओं में देखा जा सकता है। गुफाओं को ठोस चट्टानों को तरासकर बनाया गया है। प्राचीन काल में पत्थरों को तराशकर खूबसूरत मूर्तियों को गढऩे की सम़द्ध भारतीय शिल्पकला का नूमना एलिफेंटा की गुफाओं में आसानी से देखा जा सकताहै हा।लांकि पुर्तगाली शासकों ने यहां की खूबसूरत मूर्तियों पर गोलियां बरसाकर उन्हें क्षतिग्रस्त  करने मे कोई कसर नहीं छोड़ी । पुर्तगालियों ने  अपने लैंडिंग स्पेस के पास हाथी की विशालकाय मूर्ति को देखकर इस स्थान का नाम एलिफेंटा  रखा लेकि ने 1814 में हाथी की मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई और बाद में इसे टुकड़ों में काट कर मुबई के ब्क्टिोरिया गार्डन्स जू लेकर दोबारा से ले लगाया गया। इसके अलावा और भी कई हाथियों की बेशकीमती मूर्तियों को पुर्तगालियों द्वारा तोड़ा गया फिर क्षति पहुंचाई गई।

दर्शनीय :-
लगभग 60000 वर्ग फीट क्षेत्रफल में फैला गुफा मंदिर में एक बड़ा कक्ष ए दो पाश्र्व कक्ष एंव गलियारा है। मंदिर में प्रवेश के लिए तीन प्रवेश मार्ग बने हुए है। पूर्व, पश्चिम और उत्तर की ओर प्रवेश किया जा सकता है। प्रवेश द्वार सीधे एक हाल में खुलता है जहां पर शिव पुराण संबंधित द़श्य उकेरे गए हैं। इस हॉल की खासियत यह है कि यहां बहुत ही हल्कार प्रकाश रहता है जो कभी ज्यादा जो कभी कम हो जाता है। बताया जाता है प्रकाश के तेज और कम होन की बजह से यहां स्थित मर्तियों के चेहरे के भाव भी बदलते रहते हैं। हॉल में  तकरीबन 30 स्तंभ है। यहां पश्चिम की ओर शिवलिंग बना हुआ है। यहां भगवान शंकर के विभिन्न रूपों तथा क्रियाओं को दशार्मी नौ बड़ी मर्तियां है जिसमें त्रिमूर्ति प्रतिमा सबसे आकर्षक है।  इस मूर्ति की ऊंचाई 17 फुट है। इसके अलावा पंचमुखी परमेश्वर, अर्धनारश्वर, गंगाधर, शिव का भैरव रूप आदि मूर्तियां भी आकर्षि त करती है। उत्तरी प्रवेश द्वार के पश्चिम की ओर नटराज और पूर्व की ओर योगीश्वर की मूर्ति है।  एलिफेंटा विश्व
धराहर होन के साथ धार्मिक स्थल, खूबसूरत पर्यटक स्थल और पिकनिक स्पॉट भी है।

Friday, April 05, 2013

ऊं शंशनैश्चराय नम:! शनि मंदिर शिंगणापुर


शनि देव की महिमा को कौन नहीं जनता। कब अपनी कृपा दृष्टि से राजा को रंक और रंक को राजा बना दे। शनि तीर्थ स्थल में ऊं शंशनैश्चराय नम:! शनि मंदिर शिंगणापुर का अलग ही महत्व है। इस गांव में मंदर नहीं है पर शनि देव की अपार कृपा है। घर है लेकिन दरवाजे नहीं हैं। न जाने कई खुशियां और महिमा से भरा परा है शिरडी के साई बाबा से 65 किलो  मीटर दूर शिंगणापुर गांव। शिंगणापुर धार्मिक स्थल के साथ लोकप्रिय पर्यटक स्थल भी है।
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित गांव शिंगणापुर में हिंदु देवता शनि महराज देव को समर्पित प्रसिद्ध मंदिर है। इस गांव की एक रोचक कथा है। स्थानीय लोग अपने घरों में ताला नहीं लगाते हैं। शिंगणापुर शनि देव मंदिर की महिमा से कोई अंजान नहीं है। इसी वजह से शिंगणापुर धार्मिक स्थल के साथ लोकप्रिय पर्यटक स्थल है। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर जागृत देवस्थान है। माना जा है कि मंदिर में भगवान स्वयं सक्रिय यानि जीवित है और गांव के जनता और मंदिर की रक्षा करते हैं। मान्यता है कि इस गांव में कभी चोरी नहीं होती है, इसलिए मंदिर और घरों में गांव के लोग कभी ताला नहीं लगाते हैं। मंदिर के नजदीक या गांव में काई व्यक्ति चोरी करने का कोशिश करता है तो वह अंधा हो जाता है। इस युग कर यह पहला ऐसा गांव है जहां घरों में ताले नहीं लगते हैं। यह शनि महराज के कृपा से संभव है। 5.5 फुट की ऊंचे काले रंग की एक विशाल पत्थर शनि देवता के प्रतीक के रूप में खुले आकाश के नीचे एक चबूतरे पर अवस्थित है। धूप हो या आंधी, जाड़ा हो या बरसात शनिदेव बिना छत के  संगमरमर पर विरजमान रहते हैं। साथ में उनके पास भगवान शिव और हनुमान की प्रतिमा भी स्थापित है। अपराध मुक्त रिकॉर्ड के कारण इस क्षेत्र में देश का पहला बिना ताले का बैंक 2011 में खोला गया। बैंक के दरवाजे हर समय खुले रहते हैं।
मंदिर में रोजाना लगभग 50,000 आगंतुक दर्शन करने आते हैं, लेकिन इनकी संख्या अमावस्या के दिन तीन लाख से अधिक यानी छह गुना तक बढ़ जाती है। शनिदेव को खुश करने के लिए अमावस्या का दिन सबसे शुभ माना जा रहा है। शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या को लोग शनि देव की पूजा, अभिषेक और झांकी आदि निकालते हैं। नवग्रहों में शनि को सर्वश्रेष्ठ ग्रह माना जाता है क्योंकि शनि एक राशि पर ज्यादा समय तक विराजमान रहता है। कहते है जब शनि की कृपा होती है तो रंक भी राजा हो जाता है और जब शनि कुपित हो जाए या उनकी अशुभ दृष्टि पर जाए तो सब कुछ नष्ट हो जाता है। शनिदेव की महिमा अपरमपार है।